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आपकी हार और जीत जब आपकी है, तो आप हारते हैं या जीतते हैं ये भी आप पर ही निर्भर करता है || By IMRudra


                                  हार और जीत



आप हारते हैं या जीतते हैं ये भी आप पर ही निर्भर करता !



चुनौतियां ही हमारी ज़िंदगी को दिलचस्प और रोमांचक बनाते हुए मत्वपूर्ण बदलाव लाती है ॥ "इसलिए कभी भी हार न माने"...













मेरे पास कोई विकल्प या वजह नहीं है , कि मैं किसी को अच्छा या बुरा साबित करूँ। लेकिन किसी के लिए समझौता करना भी एक सीमा तक ही उचित है। उसके बाद अगर आप उससे समझौता करते हैं , तो आप अपने जीवन के साथ उस का भी जीवन खराब करते हैं।












क्योंकि वह आपको समझौता करता देख यह गलतफहमी अपने अंदर उत्पन्न कर लेता है कि वह सही कर रहा है। और उससे भी ज्यादा इस बात का उसे आत्मविश्वास हो जाता है कि वह जो करेगा सही ही करेगा। उससे गलती होने की सम्भावना ही नहीं है। और यह बात उसे तब तक गलती करवाती है जब तक उसका जीवन बर्बाद नहीं हो जाता है।
मनुष्य अपने अच्छे और बुरे के लिए स्वयं जिम्मेदार होता है।









अपने जीवन का फैसला करने की जिम्मेदारी सिर्फ आपकी होती है। आपका जीवन किसी समंदर की बहती हुई धारा की तरह है जिसका रास्ता या अंत कोई और तय नहीं कर सकता है ना ही इसको रोकने की किसी की क्षमता है। आप रुकते हैं, आप हार जाते हैं क्योंकि आप खुद से ज्यादा दूसरों से प्रभावित हैं। जिसका आपके जीवन से कोई लेना देना नहीं है । आप के कई हीरो हैं , लेकिन आप अपने हीरो नहीं हैं।







कमाल की बात है ना , जो आपके पास है उसको आप कहीं और ढूँढ रहे होते हैं जहां आपको कुछ और मिलता है। इसी उलझन में आपके जीवन का आधा समय निकाल जाता है। आप से कोई पूछता है आपका पसंदीदा व्यक्ति कौन है? आप सोचिये आपका जवाब क्या होता है..... सोचिये सोचना आवश्यक है।


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